Monday, January 19, 2009

भुलाया उसे तो


बड़ी मुद्दत बाद हौसला करके हम उसकी गली से निकले
दिल से उसका नाम मिटा कर हम हुजुमों में निकले

एक वक्त था की हमें विसाल की ख्वाहिश थी
उस जालिम ने यूँ तद्पाया की अब आह भी निकले

दिल पे हो जोर तो उसे चाहो जो तुम्हें जी-जान से चाहे
हमने तो उस शक्स को चाहा जो बेवफा निकले

कल एक तेज़ हवा मेरे दिल पे लिखा तेरा नाम मिटा गई
जिनेह पत्थर के निशान समझे,वो तो रेत पर कुछ लकीर निकले

मोहब्बत में लगा की दुनिया में और कोई उससा हसीन नहीं
भुलाया जो उसको तो हर निगाह में कोई हसीन निकले

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